सवागत है
फ़ॉलोअर
आप का लोक प्रिय ब्लॉग आज का आगरा अब फेसबुक पर अभी लाइक करे .
गुरुवार, अगस्त 13
शनिवार, अगस्त 1
परिपक्वता जीवन को सहज और सुंदर बनाती है।
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, छोटे अक्षर दिखाई नहीं देते.
शायद यह एक इशारा है कि बढ़ती उम्र के साथ छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना सीख लेना चाहिए।
![]() |
| फोटो AI जेनरेट |
मिलते हैं फिर एक नए अनमोल और सकारात्मक विचार के साथ
आपका सवाई सिंह राजपुरोहित
शुक्रवार, जुलाई 31
हमारे जीवन में सुख-दुख तो आते जाते रहेंगे
दुखिया को न सताइए। दुखिया देगा रोए। और जब दुखिया के मुखिया सुने, तब तेरी गति का होए। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन भगवान के भरोसे सब ठीक हो जाएगा ।
संत कबीर दास जी का यह प्रसिद्ध दोहा इंसानियत, करुणा और कर्म के सिद्धांतों का एक बहुत बड़ा संदेश देता है। हमें जीवन में कभी भी किसी नहीं सताना चाहिए कोई हमारी वजह से दुखी नहीं होना चाहिए ऐसा होने पर पीड़ित व्यक्ति की आंखों से निकलने वाला आंसू प्रभु तक पहुंचने में बहुत बड़ा योगदान देता है।
![]() |
| AI जेनरेट |
हमारे जीवन में सुख-दुख तो आते जाते रहेंगे आज दुखों का पहाड़ है तो कल सुख सागर भी होगा इसीलिए संकट आने पर घबराएं नहीं धैर्य बनाए रखें ऊपर वाले पर पूरा भरोसा रखिए जीवन में जो भी उतार-चढ़ाव हो रहे हैं वह आपके भले के लिए ही हो रहे हैं कुछ समय के लिए कष्ट जरूर हो रहा होगा लेकिन एक समय आएगा कि हम इन सब चीजों से छुटकारा मिल जाएगा और जीवन पहले से कहीं सुखद हो जाएगा।
अंत में बस एक ही बात बोलूंगा मुश्किल समय में धैर्य रखना चाहिए और उस मालिक पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। वही सबकी नैया पार लगाने वाला है।
जय हो मालिक की!
आपके दिन की शुरुआत सकारात्मकता और नई ऊर्जा के साथ हो!
आपका सवाई सिंह राजपुरोहित
गुरुवार, जुलाई 30
शिक्षा और धन के साथ मानवता का महत्व
शिक्षा, सत्य, सराहनीय और वर्तमान समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसमें कोई दो राय नहीं है किताबी ज्ञान, डिग्रियाँ, ऊंचे पद और धन-दौलत इंसान को समाज में सफलता तो दिला सकते हैं, लेकिन एक 'अच्छा और संवेदनशील इंसान' केवल मानवता ही बनाती है।
शिक्षा को महत्व देना और बच्चों में शिक्षा की जिज्ञासा को बढ़ाना बहुत ही आवश्यक है,वो भी वर्तमान समय में जब आप पैसे कमाए और बड़े इंसान बन जाए तो कभी भी ऐसे लाचार मजबूर बेसहारा लोगों को नजरंदाज ना करें यदि आप करने योग्य हो तो ऐसे लोगों का का मदद अवश्य करें जितना आपसे हो सके उनके लिए भी कुछ करने की कोशिश करें क्योंकि शिक्षा, पैसा यह सब जितना जरूरी है उसके साथ ही मानवता भी बहुत जरूरी है और एक बेहतर इंसान बनना बहुत जरूरी है,
आपके पास कितनी भी शिक्षा हो कितने भी पैसे हो कितने भी आप बड़े अधिकारी पद-प्रतिष्ठित हो यदि आप में मानवता नहीं और किसी के तकलीफ को देखकर आपको तकलीफ नहीं हो रही तो फिर आपका यह सब होना व्यर्थ है इसलिए शिक्षा के साथ-साथ मानवता इंसानियत भी बच्चों में अवश्य भारे, और उन्हें प्रेरणा दें उनका मार्गदर्शन करें क्योंकि जहां तक देखा जा रहा है।
आज वर्तमान समय में नौजवान युवाओं को बालक - बालिकाओं के अंदर इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं रह गई।
शिक्षा और धन के साथ मानवता का महत्व
मानवता का पाठ ही सबसे बड़ी सीख है: - बच्चों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि उनका अर्जित किया हुआ ज्ञान और धन केवल उनके अपने परिवार तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के जरूरतमंद और लाचार लोगों के काम भी आए।
सच्ची सफलता:- डिग्रियाँ और बैंक-बैलेंस तभी सार्थक हैं जब वे किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकें या किसी की मुश्किल को आसान कर सकें। जिस शिक्षा से दूसरों का दर्द महसूस न हो, वह शिक्षा अधूरी है।
संस्कारों की नींव:- आज की भागदौड़ भरी और भौतिकवादी दुनिया में बच्चों के भीतर करुणा, सहानुभूति (Empathy) और परोपकार की भावना डालना माता-पिता और अभिभावकों का सबसे बड़ा दायित्व है।
यदि हम अपने बच्चों को सफल बनाने के साथ-साथ एक संवेदनशील इंसान भी बना सकें, तो हमारी परवरिश सही मायनों में सफल होगी।
जुड़े रहिए हमारे ब्लॉग के साथ आपका सवाई सिंह राजपुरोहित
बुधवार, जुलाई 22
शब्दों की गहराई और जीवन के अनुभव ही इंसान का असली आभूषण हैं।
आपके दिन की शुरुआत सकारात्मकता और नई ऊर्जा के साथ हो! तो आज का अनमोल विचार...
शब्दों में धार नहीं बल्कि आधार होना चाहिए, क्योंकि जिन शब्दों में धार होती है वो मन को काटते है और जिन शब्दों का आधार होता है वो मन को जीत लेते है।
किसी से सब्र मिल जाता है तो किसी से सबक, इसलिए किसी से शिकायत मत करो हर कोई अपने कर्म और भूमिका में यही है,बस सीखते रहो बढ़ते रहो...
क्योंकि जीवन अनुभवों से ही सुन्दर बनता है।
इस पर आपकी क्या राय है हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं आपका सवाई सिंह राजपुरोहित
मंगलवार, जुलाई 21
जीवन में अपने सपनों को कभी छोटा मत समझिए
आज का अनमोल विचार आपके जीवन में नया सवेरा नई उम्मीदें और नई सफलताएँ लेकर आए।
"अपने सपनों को कभी छोटा मत समझो.. क्योंकि आज जो सिर्फ़ एक ख़्वाब है (सपना), वही कल आपकी सबसे बड़ी पहचान बन सकता है।
मेहनत पर भरोसा रखिए, क्योंकि किस्मत भी उसी का साथ देती है जो अपने सपनों के लिए हर दिन ईमानदारी से कोशिश करता है।
![]() |
| मेरे जन्मदिन पर पौधा लगाते हुए |
आज का यह अनमोल विचार जीवन में आगे बढ़ने और अपनी मेहनत पर अटूट विश्वास रखने की प्रेरणा देगा।
आपके दिन की शुरुआत सकारात्मकता और नई ऊर्जा के साथ हो! ऐसी में मंगल कामना करता हूं आपका सवाई सिंह राजपुरोहित
शब्दों का मुखौटा और इरादों का सच
आजकल लोगों को पहचानना बहुत ही मुश्किल हो गया है आए दिन हमारे जीवन में ऐसी घटनाओं का हमें सामना करना ही पड़ता है इसके बाद हमें पछतावा होता है कि हम ऐसे लोगों के साथ जुड़े ही क्यों थे।
लोगों के शब्दों पर नहीं, उनके इरादों पर गौर किया करो
क्योंकि कोई डांटकर भी आपका अच्छा चाहता है,
तो कोई हंसकर भी जड़ें काट देता है।
कई बार लोग मीठी वाणी या मुस्कान के पीछे अपने स्वार्थ और बुरे इरादों को छुपा लेते हैं, जिससे पहचानना मुश्किल हो जाता है।
इसके विपरीत, कुछ लोग स्वभाव से सख्त या सीधे होते हैं जो डांटकर या सच बोलकर आपका मार्गदर्शन करते हैं और आपकी भलाई सोचते हैं।
मिलते हैं किसी और अनमोल विचार के साथ तब तक के लिए आपका सवाई सिंह
रविवार, फ़रवरी 1
हमेशा "positive" सोचे और खुश रहें...।
🤞आज का सुविचार🤞
जिन्दगी का तजुर्बा तो नहीं पर इतना मालूम है, छोटा आदमी बड़े मौके पर काम आ जाता है और बड़ा आदमी छोटी सी बात पर औकात दिखा जाता है।
साथ ही जीवन में सबसे शक्तिशाली हमारी "सोच" है
जो किसी भी परिस्थिति को बदलने की ताकत रखता है इसलिए हमेशा "positive" सोचे और खुश रहें।
मंगलवार, जुलाई 8
सही समय पर सही निर्णय लेना भी आवश्यक है।
जीवन में सब कुछ अनुभव करना ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेना भी आवश्यक है। रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हो तो भी, एक अच्छा जूता पहनकर उस पर चला जा सकता है, लेकिन यदि एक अच्छे जूते के अंदर एक भी कंकड़ हो तो, एक अच्छी सड़क पर भी कुछ कदम चलना मुश्किल है।
बाहर की चुनोतियों सें नहीं हम अपनी अंदर की कमजोरियों से हारते हैं। मनुष्य को चाहिए कि वह परिस्थितियों से लड़े, एक स्वप्न टूटे, तो दूसरा गढ़े। जो मज़ा भाग लेने में है वो मज़ा भाग जाने में कहाँ।
अपने सपनों को पूरा करने के लिए की जान लगे
शुक्रवार, जून 27
हमारे बचपन का भी एक जमाना था यारो और आज ?
खुद ही स्कूल पैदल जाना होता था क्योंकि साइकिल ,बस आदि से बच्चे को स्कूल भेजने का रिवाज ही नहीं था, स्कूल भेजने के बाद कुछ अच्छा बुरा होगा ऐसा हमारे मां-बाप कभी सोचते भी नहीं थे । उस समय किसी बात का डर भी नहीं था, और पूरे गांव के लोग को ये जानते थे कि बच्चा किस का पोता या पुत्र है । खोने का डर था नहीं ।
फर्स्ट, सेकंड ,थर्ड डिवीजन पास या फेल यही हमको मालूम था । पर्सेंटेज % से हमारा कभी भी संबंध नहीं रहा ।
ट्यूशन लगाई है ऐसा बताने में भी शर्म आती थी क्योंकि हमको बुद्धि से पैदल समझा जा सकता था ।
किताबों में पीपल के पत्ते, विद्या के पत्ते, मोर पंख रखकर हम होशियार हो सकते हैं ऐसी हमारी धारणाएं थी...
कपड़े की थैली में...बस्तों में और बाद में एल्यूमीनियम की पेटियों में किताब कॉपियां बेहतरीन तरीके से जमा कर रखने में हमें महारत हासिल थी।
हर साल जब नई क्लास का बस्ता जमाते थे उसके पहले किताब कापी के ऊपर पेपर की जिल्द चढ़ाते थे और यह काम एक वार्षिक उत्सव या त्योहार की तरह होता था ।
साल खत्म होने के बाद किताबें बेचना और अगले साल की पुरानी किताबें खरीदने में हमें किसी प्रकार की शर्म नहीं होती थी.*क्योंकि तब हर साल न किताब बदलती थी और न ही पाठ्यक्रम ।
हमारे माता पिता को ऐसा कभी लगा ही नहीं कि हमारी पढ़ाई बोझ है..
किसी एक दोस्त को साइकिल के अगले डंडे पर और दूसरे दोस्त को पीछे कैरियर पर बिठाकर गली-गली में घूमना हमारी दिनचर्या थी ।*इस तरह हम ना जाने कितना घंटे किलोमीटर घूमे होंगे पता नहीं और किसी को परवाह भी नहीं , सिर्फ चोट लगने खून बहने पर ही मां के पास आना गाली डांट सुनना और कपड़े की पानी में भीगी पट्टी या और कोई इलाज करा कर डरते डरते फिर दोस्तों के साथ खेलने भाग जाना ।
स्कूल में मास्टर जी के हाथ से मार खाना, पैर के अंगूठे पकड़ कर खड़े रहना, और कान लाल होने तक मरोड़े जाते वक्त हमारा आत्म सम्मान कभी आड़े नहीं आता था । सही बताएं तो आत्मसम्मान क्या होता है यह हमें और किसी को भी मालूम ही नहीं था ।
घर और स्कूल में मार खाना भी हमारे दैनिक जीवन की एक सामान्य प्रक्रिया थी ।
मारने वाला और मार खाने वाला दोनों ही खुश रहते थे...
मार खाने वाला इसलिए क्योंकि कल से आज कम पिटे हैं और मारने वाला इसलिए कि आज फिर हाथ धो लिए ।
बिना चप्पल जूते के और किसी भी गेंद के साथ लकड़ी के कपड़े धोने वाले पट्टे से कही पर भी नंगे पैर क्रिकेट खेलने में क्या सुख था वह हमको ही पता है...
हमने जेब खर्च कभी भी मांगा ही नहीं और पिताजी ने कभी दिया भी नहीं..
इसलिए हमारी आवश्यकता भी छोटी छोटी सी ही थीं....साल में कभी-कभार दो चार बार सेव मिक्सचर मुरमुरे का भेल, गोली टॉफी , इमली, डाँसरे, खट्टा मीठा चूर्ण खा लिया तो बहुत होता था, उसमें भी हम बहुत खुश हो जाते ।...
छोटी मोटी जरूरतें तो घर में ही कोई भी पूरी कर देता था क्योंकि परिवार संयुक्त होते थे।जैसे ताऊ ताई ,चाचा चाची काका काकी, दादा दादी , बुआ आदि ..
दिवाली में लगी पटाखों की लड़ी को छुट्टा करके एक एक पटाखा फोड़ते रहने में हमको कभी अपमान नहीं लगा.
अपने मां बाप को कभी बता ही नहीं पाए कि हम आपको कितना प्रेम करते हैं क्योंकि हमको आई लव यू कहना भी नहीं आता था और भाई लट्ठ डंडे का जमाना था पीटने का भी डर था ।
स्कूल की डबल ट्रिपल सीट पर घूमने वाले हम और स्कूल के बाहर उस हाफ पेंट में रहकर गोली टाॅफी बेचने वाले की दुकान पर दोस्तों द्वारा खिलाए पिलाए जाने की कृपा हमें याद है । वह दोस्त कहां खो गए , वह बेर वाली कहां खो गई।वह चूरन बेचने वाली कहां खो गई...पता नहीं..
कपड़ों की सलवटें को प्रेस , आयरन , से नहीं मिटते थे बल्कि रात को सोते समय अपने तकिया या अपनी कमरके नीचे रखना ही काफी था । रिश्तों में कोई औपचारिकता नहीं थी।.
सुबह का खाना और रात का खाना इसके सिवा टिफिन में अखबार में लपेट कर रोटी ले जाने का सुख क्या है, आजकल के बच्चों को पता ही नही ...
हमारा भी एक बचपन और लड़कपन का जमाना था जनाब ।
👉 एक बात तो तय मानिए कि जो भी पूरा पढ़ेगा उसे अपने बीते जीवन के पुराने सुहाने पल अवश्य याद आयेंगे
Facebook se copy paste
बुधवार, दिसंबर 11
ख़ुद में निवेश कीजिए...
ख़ुद में निवेश कीजिए
लौंग टर्म में वही फ़ायदा देगा…
बाहर सब रिश्ते
"सब्जेक्ट टू मार्केट रिस्क है"
□■○●●●●●●●○■□
जो आपको नहीं समझते है
उन्हें बिल्कुल भी मत समझाइए...
समुद्र खारा है खारा ही रहेगा उसमें शक्कर मत मिलाइये।
सोमवार, दिसंबर 9
संगत सुधारिए जीवन सुधारिए
गरीब आदमी जमीन पर बैठ जाये तो वो जगह उसकी औकात कहलाती है और अगर कोई धनवान आदमी जमीन पर बैठ जाए तो
ये उसका बड़प्पन कहलाता है।
पानी की बूंद अगर कमल के पत्ते पर गिरती है तो मोती की तरह चमकने लगती है और
अगर पानी की बूंद सीप में गिर जाए तो ख़ुद मोती बन जाती है
शनिवार, दिसंबर 7
आज की दुनिया का सच
आज की दुनिया का सच-
(Aaj Ki Duniya Ka Kadva sach)
अपनी कीमत बता ना पाया तो सच अकेला रह गया बिकने को जब राजी हुआ झूठ तो फूलों में तोला गया !
साथ ही-
आप की खुशियों में वो लोग शामिल होते हैं
जिन्हें "आप" चाहते हैं..
आपके दु:ख में वो लोग शामिल होते हैं,
जो "आपको " चाहते हैं।
बुधवार, अक्टूबर 23
माता पिता की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म होता है.
अगर हर लड़की अपने सास को अपनी माँ समझें और हर सास अपनी बहू को बेटी समझे तो परिवार मैं कभी कोई लड़ाई झगड़े नही होंगे और हमें अपने माता पिता का आदर हमेशा करना चाहिये।
सभी बहू और सांसों को समझना चाहिए आपस में मिल जुल कर रहना चाहिए एक दूसरे की मदद करनी चाहिए मदद करने से ही भगवान घर में विराजमान रहते हैं और सभी दुखों का निवारण भी हो जाता है कष्ट मिट जाते हैं ऐसा नहीं कि सास को बहू गाली दे से बाहर निकाले घर से पहले सबसे पहले खाना सास को ही देना चाहिए क्योंकि अपने पति को उसी ने जन्म देकर के पाला पोसा करके अपने हवाले करते हैं तो उसका यह अदा यह नहीं कि उसका अनादर करें माता पिता ही भगवान होते हैं और माता पिता की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म होता है और कर्म जैसे कर्म करोगे वैसा ही तो आपको फल मिलेगा माता पिता से बड़ा और कोई धरती पर धरती पर नहीं है।
इसलिए मैं आप सभी से निवेदन करना चाहूंगा कि आप सभी अपने माता-पिता और सास ससुर की सेवा अवश्य करें क्योंकि माता-पिता की सेवा करने से भगवान भी प्रसन्न होते हैं
मंगलवार, अक्टूबर 22
हम जितना सोचते हैं, उतना अगर काम करने लग जाए तो ...
आज का सुविचार
आज के टाइम में सब लोग सपने बहुत देखते हैं लेकिन उन सपनों को प्राप्त करने के लिए कार्य कोई नहीं करना चाहता हालांकि सपने देखना कोई बुरी बात नहीं है क्योंकि सपने देखेंगे तभी हम उन्हें पूरा करने की कोशिश करेंगे लेकिन कुछ लोग सपने देखे तो हैं लेकिन प्राप्त करने के लिए कोई प्रयास नहीं करते चाहे उन्हें कोई कितनी बार भी समझ ले जो आपके अपने होंगे वह आपको एक - दो बार तो जरुर समझाएंगे फिर उनको भी लगने लगेगा कि शायद आप कुछ करना नहीं चाहते तो वह भी थक हार कर यह प्रयास करना छोड़ देते हैं।
सोचना इस दुनिया का सबसे फालतू काम है, क्योंकि यह बैठे -ठाले ही हमें दु:खी उदास अकर्मण्य बना जाता है! जब भी आप देखें कि आप कुछ सोचने जा रहे हैं, कोई काम करने लग जाए ! जो काम आप करेंगे उसमें सफलता जरूर मिलेगी याद रखें कि कर्म ही धर्म है! अपने धर्म का पालन करें, सोचने से बचे और कर्मठ बने ! आनंद और सफलताएं आप पर चारों दिशाओं से बरसने लगेगी।
गुरुवार, अक्टूबर 10
देश के जाने माने उद्योगपति श्री रतन टाटा जी को सादर श्रद्धांजलि
भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति श्री रतन टाटा जी के निधन का अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ। जानकर बहुत दुख हुआ उन्होंने देश की औद्योगिक प्रगति और सामाजिक विकास के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनका दृष्टिकोण, समर्पण और व्यावसायिक कुशलता न केवल टाटा समूह को नई ऊँचाइयों तक ले गई, बल्कि भारत के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।
परमपिता परमात्मा से प्रार्थना करते है कि आदरणीय श्री रतन टाटा जी की पुण्य आत्मा को ईश्वर अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोक-संतप्त परिवार को ईश्वर धैर्य प्रदान करें। ॐ शान्ति शान्ति शान्ति 💐 सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता है 💐🙏🏻🙏🏻🙏🏻 🙏 टीम सुगना फाउंडेशन और राजपुरोहित समाज इंडिया
चलते-चलते कुछ अनमोल विचार आदरणीय श्री रतन टाटा जी
श्री रतन टाटा एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में उद्यमिता और मानवीय मूल्यों की एक नई परिभाषा स्थापित की है। उनके विचार हमेशा प्रेरणादायक रहे हैं और युवाओं के लिए एक आदर्श हैं।
कड़ी मेहनत और लगन: रतन टाटा का मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है। कड़ी मेहनत और लगन ही सफलता का मूल मंत्र है।
नवाचार: वे हमेशा नए विचारों और तकनीकों को अपनाने के पक्ष में रहे हैं।
मानवीय मूल्य: रतन टाटा के लिए मानवीय मूल्य सबसे महत्वपूर्ण हैं। वे हमेशा समाज के विकास के लिए काम करते रहे हैं।
सकारात्मक सोच: मुश्किल परिस्थितियों में भी रतन टाटा सकारात्मक सोच रखते हैं।
दूसरों की मदद: वे हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहते हैं।
शनिवार, सितंबर 28
हमारा ध्यान ही हमारी दिशा को निश्चित करता है
आज का अनमोल विचार और दिल की बात...
हमारा ध्यान ही हमारी दिशा को निश्चित करता है। पीछे देखकर आगे की ओर जाने की कोशिश करना नामुमकिन है। ठीक इसी प्रकार हार के बारे में सोचकर जीतने (सफलता) की कोशिश करना नामुमकिन है। इसलिए हम सबको सिर्फ और सिर्फ हमारे टारगेट की तरफ फोकस करने की जरूरत है अगर हम अपने उद्देश्य को एक सही दिशा देंगे और इस दिशा में देखने का प्रयास करेंगे चलने का प्रयास करेंगे तो हमें जीवन में सफलता बहुत जल्दी मिल सकती।
सवाई (शौर्य प्रताप) सिंह राजपुरोहित SM सीरीज 4
गुरुवार, मार्च 7
सफलता का सबसे बड़ा सूत्र है
आपका कार्य हो, आपका इरादा मजबूत हो, और आप किसी भी हालत में हार नहीं मानते।"
अपनी टिप्पणी
[im] चित्र भेजने के लिए कोड इस प्रकार लिखें [/im]
[ma] टिप्पणी को चलते हुए दिखाएं इस कोड से [/ma]
[co="red"] रंगीन टिप्पणी लिए कोड इस प्रकार लिखें [/co]
[si="5"] टिप्पणी बड़े फाँट साईज में करने के लिए कोड [/si]
[card="yellow"] टिप्पणी की बैकग्राउंड बदलने के लिए कोड [/card]
[hi="yellow"] टिप्पणी के कुछ हिस्से को हाईलाईट करने के लिए ये कोड [/hi]
आप उपरोक्त सभी प्रकार के उदाहरण देखने के लिए यहाँ पर कलिक करें |














