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आपका "आज का आगरा" ब्लॉग पर सवागत है यह ब्लॉग मेरे मम्मी-पापा को समर्पित!..."वन्दे मातरम्" .सवाई सिंह

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मंगलवार, अगस्त 22

राधा नाम का भरपूर आनन्द लीजिए पूज्य गुरुदेव श्री प्रेमानंद जी महाराज

जीवन अनमोल है, इसका सदुपयोग कीजिए एवं राधा नाम का भरपूर आनन्द लीजिए, तभी इस मृत्यु लोक से मुक्ति मिलेगी। क्योंकि हमारा एक मात्र चिकित्सक है परमात्मा और उसकी एक मात्र औषधि है प्रार्थना।

राधे राधे श्री हरिवंश 


"अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते।

तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् ..."।। 

प्रत्येक प्राणी के लिए परमात्मा का हृदय अपनत्व-औदार्य एवं करूणा भाव से परिपूर्ण व कल्याणप्रद है; ऐसा मानकर अनन्याश्रित भाव से भगवदीय विधान के प्रति समर्पित रहें।

गुरुवार, जुलाई 20

अच्छी आदतें सीढ़ी की तरह जो हमारे जीवन को ऊचाईयाँ देती हैं : पूज्य संत श्री ललितप्रभ जी

राष्ट्रीय संत श्री ललित प्रभु सागर जी महाराज के दिव्य वचनों से लोगों के जीवन में आ रहे हैं परिवर्तन मैं मैं खुद गुरु महाराज जी को 2003 से फॉलो कर रहा हूं काफी कुछ जीवन में परिवर्तन आया है गुरु महाराज जी की वाणी से उनके द्वारा बताए मार्गों से... शौर्य प्रताप सिंह राजपुरोहित 

उदयपुर, 18 जुलाई राष्ट्र-संत श्री ललितप्रभ जी महाराज ने कहा है कि हमारी आदतें ही हमारा भविष्य तय करती हैं। कोई भी व्यक्ति अगर श्रेष्ठ जीवन का मालिक बनना चाहता है तो उसे अपने जीवन में अच्छी आदतों का मालिक बनना चाहिए। हमारा जीवन अच्छा होगा या बुरा - हमारी आदतें ही हमारा फ्यूचर तय करती है। अच्छी आदतें सीढ़ी की तरह हैं जो हमें ऊपर लेकर जाती है और बुरी आदतें भी सीढ़ी की ही भूमिका अदा करती है जो हमें ऊपर से नीचे ले आती है। जैसे होंठ फटने पर नाभि में तेल या घी की बूँद डाली जाती थी वैसे ही अच्छे जीवन का मालिक बनने के लिए अच्छी आदतों का होना जरूरी है। दुनिया में एक ही व्यक्ति है जो हमारे जीवन को बदल सकता है और वह हम खुद हैं। हर आदमी में कुछ खामियाँ होती हैं और कुछ खासियत होती हैं, खामियों को जीतना पड़ता है और खासियत को जीना होता है।

मंच पर आकर कई लोगों ने किया अपने व्यसनों का त्याग

संतप्रवर ने यहाँ टाउन हॉल मैदान में आयोजित 54 दिवसीय प्रवचनमाल में बुरी आदतों को कैसे बदलें अच्छी आदत में विषय पर प्रवचन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें अपनी आदतों के प्रति सावधान रहना चाहिए। आदत लगने में वक्त नहीं लगता पर खत्म होने में पूरी जिंदगी लग जाती है। तभी तो कहते हैं कि यह आदमी आदत से मजबूर है। अगर घर के अभिभावक बचपन से ही अच्छी आदतों का  बीजारोपण करना शुरू कर दें तो वे आदतें बड़े होने पर हमारे जीवन का संस्कार बन जाती हैं। जैसा पाणी-वैसी वाणी, जैसा आहार-वैसा व्यवहार, जैसा अन्न-वैसा मन और जैसी संगत वैसी ही- रंगत जीवन में आती है। हमें संगति के प्रति सावधान रहना चाहिए क्योंकि अच्छी संगत और अच्छी आदत हमारे जीवन को सँवार देती है।


राष्ट्र-संत ने कहा कि आदमी बीवी का गुलाम नहीं होता अपितु उससे भी ज्यादा अपनी आदतों का होता है। खुद की कमजोरियों को पहचानना इंसान की सबसे बड़ी विजय है। हम गौड न भी बन पाएँ पर गुड तो बन ही सकते हैं। संतश्री ने कहा कि हमें सबसे पहले दूसरों की कमियाँ निकालने की आदत को ठीक कर लेना चाहिए। अगर आपको एक में कभी नजर आए तो उससे बात कीजिए पर हर एक में कमी नजर आए तो खुद से बात कीजिए। उन्होंने सावधान किया कि जब भी किसी में कमी नजर आए तो ध्यान रखिए कमियाँ आप में भी है और जबान दूसरों के पास भी है। उन्होंने दूसरों की मजाक उड़ाने की आदत को भी अनुचित बताया और कहा कि अगर हम दूसरों का पानी उतारेंगे तो सामने वाला व्यक्ति हमारी आरती नहीं उतारेगा।

संतश्री ने कहा कि हमें कभी किसी की आलोचना भी नहीं करनी चाहिए। यह हमारी ऐसी गंदी आदत है जिस पर हम दूसरों की गलती पर अपनी जुबान गंदी करते हैं। हमें हमेशा दूसरों की विशेषताएँ देखनी चाहिए। हमेशा दूसरों की प्रशंसा करनी चाहिए। अच्छी किताबें पढऩे की आदत, किसी के सहयोग की आदत, भलाई की आदत, हर हाल में मुस्कुराने की आदत - ये सब वे आदतें हैं जो हमारे जीवन के स्तर को ऊचाँ उठाती हैं। उन्होंने सावधान करते हुए कहा कि हमें मोबाइल की आदत भी बहुत ज्यादा घेर रही हैं। जब तक फोन वायर से बंधा था तब तक आदमी आजाद था और जिस दिन फोन वायर से आजाद हुआ तब से आदमी फोन से बंध गया। सब टच मोबाइल में खोये हैं पर कोई किसी के टच में नहीं है। उन्होंने कहा कि मोबाइल का उपयोग करने से डिप्रेशन बढ़ जाता है, आँखे खराब हो जाती हैं, नींद की कमी हो जाती है, याददास्त कमजोर होने लगती और आँखों के नीचे निशान आने शरू हो जाते हैं।

राष्ट्र-संत ने कहा कि व्यसन मुक्ति पर विशेष जोर देते हुए कहा कि हर व्यक्ति और कोई सद्गुण अपनाए या न अपनाए पर सदा नशा मुक्त जीवन जीना चाहिए क्योंकि नशा नाश की निशानी होती है। उन्होंने कहा कि हर दिल की अब एक ही चाहत, व्यसन मुक्त हो मेरा भारत। नशा दाँत से आँत तक, दिल से दिमाग तक नुकसान करता है। शरीर में बीमारीयाँ पैदा होती हैं, भविष्य खराब होता है, परिवार टूट जाता है। व्यक्ति को गुटखा, तम्बाकू, शराब जैसे बुरी आदतों जैसे बचना चाहिए क्योंकि ये तन, मन, धन तीनों को नुकसान पहुँचाती है। संतप्रवर की प्रेरक वचनों से प्रभावित होकर लोगों ने मंच पर आकर कई लोगों ने व्यसनों का त्याग किया। जब एक महिला से संत पूछा कि आज आपके पति नशे का त्याग कर रहे हैं तब आपको ज्यादा खुशी मिल रही है या ये आपको पाँच लाख का हीरे का हार लाकर दे तो ज्यादा खुशी होगी। महिला के जवाब पर पूरे पांडाल में तालियों कि गडग़ड़ाहट हो गई जब उन्होंने कहा कि आज में बेहद खुश हूँ, मुझे कोई हीरों का हार नहीं चाहिए। मेरे पति ने व्यसनों का त्याग करके आज जीवन की बाजी जीत ली है।

समारोह का सफल संचालन संयोजक हँसराज चौधरी ने किया। समिति के अध्यक्ष राज लोढ़ा के अनुसार बुधवार को सुबह 8.45 बजे संत चन्द्रप्रभ जी महाराज आलस्य को जड़ से मिटाने का तरीका विषय पर विशेष प्रवचन देंगे।

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पूज्य संत श्री ललित प्रभु महाराज जी

बुधवार, जुलाई 19

भगवान अर्थात परमात्मा एक जलती दीप की रौशनी के समान हैं.

जो केवल अंतरात्मा से देखा जा सकता है, बाहरी नजरों से देखना यू आसान नहीं हैं। वैसे अगर हम अभी तक जीवित भी है तो सिर्फ वो सिर्फ उनकी कृपा से, और भगवान का अकाउंट अर्थात् लेखा जोखा किसी एक जन्म का नहीं होता उनके पास तो जन्म जन्मांतर का होता हैं।

नीचे के हिसाब किताब गड़बड़ हो सकते है परंतु उनके यहां का नहीं। ये दुनिया आस्था और विश्वास पर टिकीं है। हमारी आस्था और विश्वास भी है एक दिन जरूर सब ठीक हो जाएगा। ऊपर वाले पर भरोसा रखो।



ज्ञान तीन तरह से प्राप्त किया जा सकता है

अनमोल विचार

 ज्ञान तीन तरह से प्राप्त किया जा सकता है,
पहला मनन से जो सर्वश्रेष्ठ है,
दूसरा अनुसरण से जो सबसे आसान है,
तीसरा अनुभव से जो कि कड़वा हैं.



अगर इन्सान खुद की गलतियों को अपनी उंगलियो पर गिनने लगे तो..
दुसरो की ज़िन्दगी में उंगली करने का वक़्त ही नहीं मिलेगा..!


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