किसी का सुख छीनकर... उसकी मानसिक स्थिति खराब करके आप खुद के घर में शाति नहीं ला सकते...
हिसाब तो होगा.... बस कब होगा ये देखना है
भगवान पर भरोसा रखिए
किसी का सुख छीनकर... उसकी मानसिक स्थिति खराब करके आप खुद के घर में शाति नहीं ला सकते...
हिसाब तो होगा.... बस कब होगा ये देखना है
भगवान पर भरोसा रखिए
तारीफ़ करने योग्य की
तारीफ़ ज़रूर करें
न जाने कब आपकी तारीफ़ से
उसकी ज़िंदगी बदल जाये...
मीठा बोलकर दिल जीतना आसान है, लेकिन सच बोलकर रिश्ता बचाना बहुत मुश्किल । इसलिए सच्चे लोग अक्सर कम और नकली रिश्ते ज्यादा दिखाई देते हैं।
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मैंने अपनी ज़िंदगी में
सारे महंगे सबक
सस्ते लोगों से ही सीखे हैं।
कभी-कभी इंसान को जरूरत से ज्यादा महत्व और तारीफ मिलने लगे तो वह अपनी असली हैसियत भूलकर खुद को दूसरों से बड़ा समझने लगता है। यही कारण है कि हर किसी को खुश करने और हर बात पर महत्व देने से पहले यह समझना जरूरी है कि सम्मान उसी का सुंदर लगता है, जो उसे पाकर भी विनम्र बना रहे। ध्यान और प्रशंसा किसी की योग्यता का प्रमाण नहीं, बल्कि कभी-कभी सिर्फ लोगों की उदारता होती है।
इसलिए जीवन में न तो अपनी तारीफ सुनकर घमंड करना चाहिए और न ही किसी को इतना सिर पर चढ़ाना चाहिए कि वह दूसरों को छोटा समझने लगे। असली ताकत ऊँची आवाज़, रौब या दिखावे में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार, संयम और विनम्रता में होती है। जो लोग खुद को साबित करने के लिए शोर नहीं मचाते, उनका खामोश आत्मविश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनता है।[hi="yellow"] टिप्पणी के कुछ हिस्से को हाईलाईट करने के लिए ये कोड [/hi]
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