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आपका "आज का आगरा" ब्लॉग पर सवागत है यह ब्लॉग मेरे मम्मी-पापा को समर्पित!..."वन्दे मातरम्" .सवाई सिंह

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गुरुवार, अगस्त 13

जीवन में समझ बहुत ही जरूरी है।


जीवन में समझ बहुत ही जरूरी है।
जितनी समझ गहरी होती है उतना ही जीवन सुखी और समृद्ध होता है।

हर किसी को समझना हर किसी के वश में नहीं होता है 

जौहरी ही हीरे को परख सकता है।
अन्य नासमझ लोग पत्थर ही समझेंगे 
आपका जीवन समझ और प्रेम से भरा रहे।

शनिवार, अगस्त 1

परिपक्वता जीवन को सहज और सुंदर बनाती है।

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, छोटे अक्षर दिखाई नहीं देते.

शायद यह एक इशारा है कि बढ़ती उम्र के साथ छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करना सीख लेना चाहिए।

फोटो AI जेनरेट
हमें जीवन में छोटी-छोटी बातों को दिल से (हृदय) बिल्कुल नहीं लगना चाहिए हर छोटी गलती पर लोगों से उलझने से मानसिक शांति की कमी हो जाती है जैसे-जैसे अनुभव होता है वैसे-वैसे हमें यह समझ में भी आना चाहिए कि किस बात को हमें तुल देना है और किस बात पर मुस्कुराकर लोगों को नजर अंदाज कर देना है यही परिपक्वता जीवन को सहज और सुंदर बनाने में काफी मददगार होती है।  हालांकि ऐसा हमारे लिए करना थोड़ा मुश्किल जरूर होता है लेकिन प्रयास जरूर किया जा सकता है मैं वर्तमान समय में इन्हीं सभी चीजों से सामना कर रहा हूं और मुझे पता है कि यह करना संभव नहीं है हर किसी के लिए।

मिलते हैं फिर एक नए अनमोल और सकारात्मक विचार के साथ

आपका सवाई सिंह राजपुरोहित


शुक्रवार, जुलाई 31

हमारे जीवन में सुख-दुख तो आते जाते रहेंगे

दुखिया को न सताइए। दुखिया देगा रोए। और जब दुखिया के मुखिया सुने, तब तेरी गति का होए। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन भगवान के भरोसे सब ठीक हो जाएगा ।

संत कबीर दास जी का यह प्रसिद्ध दोहा इंसानियत, करुणा और कर्म के सिद्धांतों का एक बहुत बड़ा संदेश देता है। हमें जीवन में कभी भी किसी  नहीं सताना चाहिए कोई हमारी वजह से दुखी नहीं होना चाहिए ऐसा होने पर पीड़ित व्यक्ति की आंखों से निकलने वाला आंसू प्रभु तक पहुंचने में बहुत बड़ा योगदान देता है। 

AI जेनरेट

हमारे जीवन में सुख-दुख तो आते जाते रहेंगे आज दुखों का पहाड़ है तो कल सुख सागर भी होगा इसीलिए संकट आने पर घबराएं नहीं धैर्य बनाए रखें ऊपर वाले पर पूरा भरोसा रखिए जीवन में जो भी उतार-चढ़ाव हो रहे हैं वह आपके भले के लिए ही हो रहे हैं कुछ समय के लिए कष्ट जरूर हो रहा होगा लेकिन एक समय आएगा कि हम इन सब चीजों से छुटकारा मिल जाएगा और जीवन पहले से कहीं सुखद हो जाएगा।

अंत में बस एक ही बात बोलूंगा मुश्किल समय में धैर्य रखना चाहिए और उस मालिक पर पूरा भरोसा रखना चाहिए। वही सबकी नैया पार लगाने वाला है।

​जय हो मालिक की! 

​आपके दिन की शुरुआत सकारात्मकता और नई ऊर्जा के साथ हो!

आपका सवाई सिंह राजपुरोहित

गुरुवार, जुलाई 30

शिक्षा और धन के साथ मानवता का महत्व

शिक्षा, सत्य, सराहनीय और वर्तमान समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसमें कोई दो राय नहीं है किताबी ज्ञान, डिग्रियाँ, ऊंचे पद और धन-दौलत इंसान को समाज में सफलता तो दिला सकते हैं, लेकिन एक 'अच्छा और संवेदनशील इंसान' केवल मानवता ही बनाती है।

शिक्षा को महत्व देना और बच्चों में शिक्षा की जिज्ञासा को बढ़ाना बहुत ही आवश्यक है,वो भी वर्तमान समय में जब आप पैसे कमाए और बड़े इंसान बन जाए तो कभी भी ऐसे लाचार मजबूर बेसहारा लोगों को नजरंदाज ना करें यदि आप करने योग्य हो तो ऐसे लोगों का का मदद अवश्य करें जितना आपसे हो सके उनके लिए भी कुछ करने की कोशिश करें क्योंकि शिक्षा, पैसा यह सब जितना जरूरी है उसके साथ ही मानवता भी बहुत जरूरी है और एक बेहतर इंसान बनना बहुत जरूरी है, 

आपके पास कितनी भी शिक्षा हो कितने भी पैसे हो कितने भी आप बड़े अधिकारी पद-प्रतिष्ठित हो यदि आप में मानवता नहीं और किसी के तकलीफ को देखकर आपको तकलीफ नहीं हो रही तो फिर आपका यह सब होना व्यर्थ है इसलिए शिक्षा के साथ-साथ मानवता इंसानियत भी बच्चों में अवश्य भारे, और उन्हें प्रेरणा दें उनका मार्गदर्शन करें क्योंकि जहां तक देखा जा रहा है।

 आज वर्तमान समय में नौजवान युवाओं को बालक - बालिकाओं के अंदर इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं रह गई। 

  शिक्षा और धन के साथ मानवता का महत्व

​मानवता का पाठ ही सबसे बड़ी सीख है: - बच्चों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि उनका अर्जित किया हुआ ज्ञान और धन केवल उनके अपने परिवार तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के जरूरतमंद और लाचार लोगों के काम भी आए।

​सच्ची सफलता:- डिग्रियाँ और बैंक-बैलेंस तभी सार्थक हैं जब वे किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकें या किसी की मुश्किल को आसान कर सकें। जिस शिक्षा से दूसरों का दर्द महसूस न हो, वह शिक्षा अधूरी है।

​संस्कारों की नींव:- आज की भागदौड़ भरी और भौतिकवादी दुनिया में बच्चों के भीतर करुणा, सहानुभूति (Empathy) और परोपकार की भावना डालना माता-पिता और अभिभावकों का सबसे बड़ा दायित्व है।

यदि हम अपने बच्चों को सफल बनाने के साथ-साथ एक संवेदनशील इंसान भी बना सकें, तो हमारी परवरिश सही मायनों में सफल होगी।

जुड़े रहिए हमारे ब्लॉग के साथ आपका सवाई सिंह राजपुरोहित


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