मीठा बोलकर दिल जीतना आसान है, लेकिन सच बोलकर रिश्ता बचाना बहुत मुश्किल । इसलिए सच्चे लोग अक्सर कम और नकली रिश्ते ज्यादा दिखाई देते हैं।
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मैंने अपनी ज़िंदगी में
सारे महंगे सबक
सस्ते लोगों से ही सीखे हैं।
मीठा बोलकर दिल जीतना आसान है, लेकिन सच बोलकर रिश्ता बचाना बहुत मुश्किल । इसलिए सच्चे लोग अक्सर कम और नकली रिश्ते ज्यादा दिखाई देते हैं।
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मैंने अपनी ज़िंदगी में
सारे महंगे सबक
सस्ते लोगों से ही सीखे हैं।
कभी-कभी इंसान को जरूरत से ज्यादा महत्व और तारीफ मिलने लगे तो वह अपनी असली हैसियत भूलकर खुद को दूसरों से बड़ा समझने लगता है। यही कारण है कि हर किसी को खुश करने और हर बात पर महत्व देने से पहले यह समझना जरूरी है कि सम्मान उसी का सुंदर लगता है, जो उसे पाकर भी विनम्र बना रहे। ध्यान और प्रशंसा किसी की योग्यता का प्रमाण नहीं, बल्कि कभी-कभी सिर्फ लोगों की उदारता होती है।
इसलिए जीवन में न तो अपनी तारीफ सुनकर घमंड करना चाहिए और न ही किसी को इतना सिर पर चढ़ाना चाहिए कि वह दूसरों को छोटा समझने लगे। असली ताकत ऊँची आवाज़, रौब या दिखावे में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार, संयम और विनम्रता में होती है। जो लोग खुद को साबित करने के लिए शोर नहीं मचाते, उनका खामोश आत्मविश्वास ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनता है।“पुराने लोगों के पास शायद गूगल नहीं था, लेकिन जिंदगी पढ़ने का अनुभव था, आज के युवाओं के पास पूरी दुनिया की जानकारी है, मगर उस जानकारी को जीवन की समझ में बदलने के लिए अनुभव की जरूरत अभी भी है।”
और यही सबसे बड़ी बात है पीढ़ी बदलनी चाहिए, लेकिन संस्कार, रिश्तों की कद्र और दूरदर्शिता नहीं बदलनी चाहिए।
आज समय रहते बड़े बुजर्गो से युवा पीढ़ी आपस मे संवाद उनके जीवन काल का हर पहलु पर बड़े गौर से सुनना समझना और अपने जीवन मे उतारना क्यों की आज के युवाओं मे धैर्य सयम कोई पारिवारिक निर्णय लेने मे जल्दबाजी रहती है और बुजुर्गो मे उम्र के साथ साथ हर प्रकार की जीवन उस समय तकलीफो से अनुभव हो जाता है बुजुर्ग कोई भी तर्क करे बड़े सोच समझ कर दूरगामी सोच रखकर तर्क रखते है आज के युवा कितने सहमत होते है ये उनकी सोच पर निर्भर करता है पहले आज जितनी सुख सुविधा भी नहीं थी उनके जाने के बाद मे बस उनकी ये यादे सजो कर याद कर सकते है इसलिए समय रहते रहते बुजुर्गो से 30 मिनिट आपस मे सवाद जरूर युवाओ को करना चाहिए । ऐसा करने से आने वाली पीढ़ी के लिए यह किसी वरदान से काम नहीं होगा। किसी के अनुभव से हम जो सीख सकते हैं हम यह भी जानते हैं भागदौड़़ वाली जिंदगी में समय निकालना बहुत ही मुश्किल है लेकिन ऐसा करने से हमें भविष्य में बहुत सारे फायदे होंगे जो हम उनसे सीखेंगे वह टेक्नोलॉजी हमें कभी नहीं सिखा सकती।
चलते-चलते हैं आप सभी को भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं भगवान आपकी सारी मनोकामना को पूर्ण करें परिवार में सुख शांति और समृद्धि सदैव बनी रहे.
मिलते हैं किसी और अनमोल विचार के साथ SM सीरीज के अगले पार्ट में... आपका सवाई सिंह राजपुरोहित
इस संसार में धन, पद और रिश्ते यहीं छूट जाते हैं, लेकिन मनुष्य के अच्छे कर्म और उसका सच्चा धर्म (कर्तव्य, सदाचार और मानवीय मूल्य) ही ऐसी पूँजी हैं जो इस लोक के साथ-साथ परलोक में भी उसकी यात्रा के संबल बनते हैं। मनुष्यों को इसका पालन करना चाहिए
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| गुरुदेव का आशिर्वाद लेते MLA राजपुरोहित |
गीता में भी कहा गया है कि आत्मा अजर-अमर है, और शरीर के नाश होने के बाद भी उसके द्वारा किए गए कर्मों का संस्कार और फल उसके साथ आगे जाता है।
"यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः।न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम्॥"जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों और धर्म का पालन करते हुए निष्काम भाव से सत्कर्म करता है, उसका यह लोक तो सुधरता ही है, परलोक भी श्रेष्ठ हो जाता है। अच्छे कर्म ही वो प्रकाश हैं जो अंधकारमय मार्ग में राह दिखाते हैं।
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