सवागत है

आपका "आज का आगरा" ब्लॉग पर सवागत है यह ब्लॉग मेरे मम्मी-पापा को समर्पित!..."वन्दे मातरम्" .सवाई सिंह

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रविवार, नवंबर 8

जीवन में हर व्यक्ति आपके साथ एक जैसा व्यवहार नहीं.....

बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक सुविचार..

जीवन में हर व्यक्ति आपके साथ एक जैसा व्यवहार नहीं करेगा। कोई आपकी प्रशंसा करेगा, तो कोई आपकी आलोचना; कोई आपको अपना मानेगा, तो कोई विरोध करेगा।

लेकिन यदि आपका मन हर व्यक्ति के व्यवहार के अनुसार बदलने लगे, तो आपकी शांति दूसरों के हाथों में चली जाती है।

इसलिए किसी के प्रेम में अहंकार न करें और किसी के विरोध में स्वयं को कमजोर न समझें।

सम्मान मिलने पर विनम्र रहें और अपमान होने पर भी अपने विवेक को न खोएँ।

अगर कोई आपसे अपने मन की बात "Share" करता है तो...

कलयुग का एकदम सत्य विचार 

कुछ लोग इतिहास नहीं रच पाते...🌎 

इसीलिए साजिशें रचते रहते हैं.!! 🎭

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यही तो जीवन की सच्चाई है इसी सच्चाई को तो लोग समझ नहीं पाते जिसके ऊपर बीती है वही जानता है की जख्म कितना तकलीफ देता है यही समझाने की कोशिश तो कर रहे हैं की बहुत छोटी सी जिंदगी है किसी को एटीट्यूड में क्यों गुजर रहे हो खुल के बात करो एक दूसरे का साथ निभाओ सुख-दुख बटन क्या पता आज जिंदा है तो बात कर रहे हैं कल क्या पता जिंदा ना हो तो कौन किस बात करेगा ।

अगर कोई आपसे अपने मन की बात "Share" करता है तो 

समंदर बनना, "Newspaper" नहीं। 

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आपका 

Sawai Singh Rajpurohit


जिंदगी की आधी शिकायते ऐसे ही ठीक हो जाये

 आज का सुविचार

 जिंदगी की आधी शिकायते ऐसे ही ठीक हो जाये, अगर लोग..एक दूसरे के बारे में "बोलने" की जगह एक दूसरे से "बोलना" सीख जाए...!

  साथ ही जहा पर सुख हो लेकिन 'शांति' ना हो तो..समझ लेना कि आप सुविधा को ग़लती से सुख समझ रहे हैं.!

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बहुत ही सुंदर और प्रेरणादायक सुविचार

धन्यवाद" सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि कृतज्ञता (Gratitude) का वह भाव है जो दिलों को जोड़ता है और हमारे संस्कारों की महक को चारों तरफ फैलाता है।


रविवार, अक्टूबर 25

आध्यात्मिक अभ्यास के लिये जीवन के सर्वश्रेष्ठ समय के बारे में महाराज जी कहते हैं।

हम हमेशा ज़िन्दगी का वह वक़्त भगवान को देने की कोशिश करते हैं, जो और किसी काम का नहीं होता। जब हमारा समाज, हमारी औलाद, दोस्त और रिश्तेदार हमसे किनारा कर लेते हैं, तब हमारा ध्यान परमात्मा की भक्ति की ओर जाता है। जब हम बूढ़े हो जाते हैं और शरीर के अंग हमारा साथ छोड़ देते हैं- आँखें ठीक से देख नहीं पातीं, कान सुन नहीं पाते और शरीर के बाक़ी अंग भी साथ छोड़ देते हैं- तब हम मालिक की भक्ति करना चाहते हैं। हमें अपनी ज़िन्दगी का सबसे बेहतरीन वक़्त परमात्मा की भक्ति में लगाना चाहिए।

प्रेम की विरासत (किताब में से)



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