शिक्षा, सत्य, सराहनीय और वर्तमान समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इसमें कोई दो राय नहीं है किताबी ज्ञान, डिग्रियाँ, ऊंचे पद और धन-दौलत इंसान को समाज में सफलता तो दिला सकते हैं, लेकिन एक 'अच्छा और संवेदनशील इंसान' केवल मानवता ही बनाती है।
शिक्षा को महत्व देना और बच्चों में शिक्षा की जिज्ञासा को बढ़ाना बहुत ही आवश्यक है,वो भी वर्तमान समय में जब आप पैसे कमाए और बड़े इंसान बन जाए तो कभी भी ऐसे लाचार मजबूर बेसहारा लोगों को नजरंदाज ना करें यदि आप करने योग्य हो तो ऐसे लोगों का का मदद अवश्य करें जितना आपसे हो सके उनके लिए भी कुछ करने की कोशिश करें क्योंकि शिक्षा, पैसा यह सब जितना जरूरी है उसके साथ ही मानवता भी बहुत जरूरी है और एक बेहतर इंसान बनना बहुत जरूरी है,
आपके पास कितनी भी शिक्षा हो कितने भी पैसे हो कितने भी आप बड़े अधिकारी पद-प्रतिष्ठित हो यदि आप में मानवता नहीं और किसी के तकलीफ को देखकर आपको तकलीफ नहीं हो रही तो फिर आपका यह सब होना व्यर्थ है इसलिए शिक्षा के साथ-साथ मानवता इंसानियत भी बच्चों में अवश्य भारे, और उन्हें प्रेरणा दें उनका मार्गदर्शन करें क्योंकि जहां तक देखा जा रहा है।
आज वर्तमान समय में नौजवान युवाओं को बालक - बालिकाओं के अंदर इंसानियत नाम की कोई चीज नहीं रह गई।
शिक्षा और धन के साथ मानवता का महत्व
मानवता का पाठ ही सबसे बड़ी सीख है: - बच्चों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि उनका अर्जित किया हुआ ज्ञान और धन केवल उनके अपने परिवार तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के जरूरतमंद और लाचार लोगों के काम भी आए।
सच्ची सफलता:- डिग्रियाँ और बैंक-बैलेंस तभी सार्थक हैं जब वे किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकें या किसी की मुश्किल को आसान कर सकें। जिस शिक्षा से दूसरों का दर्द महसूस न हो, वह शिक्षा अधूरी है।
संस्कारों की नींव:- आज की भागदौड़ भरी और भौतिकवादी दुनिया में बच्चों के भीतर करुणा, सहानुभूति (Empathy) और परोपकार की भावना डालना माता-पिता और अभिभावकों का सबसे बड़ा दायित्व है।
यदि हम अपने बच्चों को सफल बनाने के साथ-साथ एक संवेदनशील इंसान भी बना सकें, तो हमारी परवरिश सही मायनों में सफल होगी।
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