“पुराने लोगों के पास शायद गूगल नहीं था, लेकिन जिंदगी पढ़ने का अनुभव था, आज के युवाओं के पास पूरी दुनिया की जानकारी है, मगर उस जानकारी को जीवन की समझ में बदलने के लिए अनुभव की जरूरत अभी भी है।”
और यही सबसे बड़ी बात है पीढ़ी बदलनी चाहिए, लेकिन संस्कार, रिश्तों की कद्र और दूरदर्शिता नहीं बदलनी चाहिए।
आज समय रहते बड़े बुजर्गो से युवा पीढ़ी आपस मे संवाद उनके जीवन काल का हर पहलु पर बड़े गौर से सुनना समझना और अपने जीवन मे उतारना क्यों की आज के युवाओं मे धैर्य सयम कोई पारिवारिक निर्णय लेने मे जल्दबाजी रहती है और बुजुर्गो मे उम्र के साथ साथ हर प्रकार की जीवन उस समय तकलीफो से अनुभव हो जाता है बुजुर्ग कोई भी तर्क करे बड़े सोच समझ कर दूरगामी सोच रखकर तर्क रखते है आज के युवा कितने सहमत होते है ये उनकी सोच पर निर्भर करता है पहले आज जितनी सुख सुविधा भी नहीं थी उनके जाने के बाद मे बस उनकी ये यादे सजो कर याद कर सकते है इसलिए समय रहते रहते बुजुर्गो से 30 मिनिट आपस मे सवाद जरूर युवाओ को करना चाहिए । ऐसा करने से आने वाली पीढ़ी के लिए यह किसी वरदान से काम नहीं होगा। किसी के अनुभव से हम जो सीख सकते हैं हम यह भी जानते हैं भागदौड़़ वाली जिंदगी में समय निकालना बहुत ही मुश्किल है लेकिन ऐसा करने से हमें भविष्य में बहुत सारे फायदे होंगे जो हम उनसे सीखेंगे वह टेक्नोलॉजी हमें कभी नहीं सिखा सकती।
चलते-चलते हैं आप सभी को भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं भगवान आपकी सारी मनोकामना को पूर्ण करें परिवार में सुख शांति और समृद्धि सदैव बनी रहे.
मिलते हैं किसी और अनमोल विचार के साथ SM सीरीज के अगले पार्ट में... आपका सवाई सिंह राजपुरोहित



