यही होता है जब रिश्ते में हम होते हैं। रिश्ते में एक ही इंसान कदर, समझ और प्यार का साथ देता है और त्याग करता रहता है मगर दूसरे इंसान को फीलिङ्ग्स की कोई कदर नहीं होती है। दूसरा इंसान फीलिङ्ग्स की परवाह नहीं करता है और अपने खराब नेचर और व्यवहार के कारण दिल को दर्द और अकेलापन देता है। फिर एक तरफा रिश्ता निभाना , झुकना, सम्झौता करना सुकून नहीं देता है। ऐसे में ज़िंदगी बस घुटन भरी हो जाती है और रिश्ता होकर भी नाम का रहता है।
यहां लोग अपनी गलती नहीं मानते किसी को अपना कैसे मानेंगे







