पैसा घर तक साथ रहेगा और परिवार स्मशान तक,
जबकी कर्म और धर्म इस लोक के साथ परलोक में भी साथ रहेगा !!
इस संसार में धन, पद और रिश्ते यहीं छूट जाते हैं, लेकिन मनुष्य के अच्छे कर्म और उसका सच्चा धर्म (कर्तव्य, सदाचार और मानवीय मूल्य) ही ऐसी पूँजी हैं जो इस लोक के साथ-साथ परलोक में भी उसकी यात्रा के संबल बनते हैं। मनुष्यों को इसका पालन करना चाहिए
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| गुरुदेव का आशिर्वाद लेते MLA राजपुरोहित |
गीता में भी कहा गया है कि आत्मा अजर-अमर है, और शरीर के नाश होने के बाद भी उसके द्वारा किए गए कर्मों का संस्कार और फल उसके साथ आगे जाता है।
"यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः।
न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम्॥"
जो व्यक्ति अपने कर्तव्यों और धर्म का पालन करते हुए निष्काम भाव से सत्कर्म करता है, उसका यह लोक तो सुधरता ही है, परलोक भी श्रेष्ठ हो जाता है। अच्छे कर्म ही वो प्रकाश हैं जो अंधकारमय मार्ग में राह दिखाते हैं।
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