बुधवार, अगस्त 26

मरने के बाद न जाने लोग इतनी अच्छाईयाँ कहाँ से ढूंढ लाते है!

नमस्ते दोस्तों 

 जिंदगी में जीते जी लोग जीने नहीं देते लेकिन मरने के बाद उस व्यक्ति के अंदर इतनी खूबियां निकाल लेते हैं समझ नहीं आता कि उस व्यक्ति को अपनी खूबियों को सुनने के लिए मरना पड़ता है.

 कोई व्यक्ति लाख अच्छे काम करें लेकिन उसके बावजूद व्यक्ति उसमें से कोई ना कोई कमियां जरूर निकालते हैं लेकिन इन कमियों से आप लोग घबराए नहीं . एक कहावत है जो आलोचक और जो कमियां निकालते हैं वही हमारे सच्चे मित्र होते हैं और जीवन में आगे बढ़ने के लिए इन लोगों का साथ होना बहुत जरूरी है इसीलिए जब कभी कोई आपकी कमियां निकाले तो घबराए बिल्कुल भी नहीं। आप अपना काम करतेे रहे क्योंकि लाखों लोग सो रहे होते हैं पर सूरज हमेशा निकलताा है अंधकार को चीरते हुए.

चलते चलते आज का अनमोल विचार

 जिंदे रहते हैं 

 "तब तक लोग कमीयाँ ही निकालते रहते है,, 

"मरने के बाद न जाने लोग इतनी

 अच्छाईयाँ कहाँ से ढूंढ लाते है! "

 आप सभी मित्रों को राधा अष्टमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं

"प्रेम से बोलो जय श्री राधे"


4 टिप्‍पणियां:

  1. सादर नमस्कार,
    आपकी प्रविष्टि् की चर्चा शुक्रवार ( 28-08-2020) को "बाँच ली मैंने व्यथा की बिन लिखी पाती नयन में !"
    (चर्चा अंक-3807)
    पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है.

    "मीना भारद्वाज"

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    1. बहुत-बहुत धन्यवाद हमारा उत्साहवर्धन करने के लिए

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  2. जीवन ऊँची-नीची घाटियों से गुज़रता हुआ अर्थ तलाशता रहता है।
    इसी अर्थ को बख़ूबी शब्द दिए है आपने आदरणीय सर।
    सुंदर एवं विचारणीय सृजन।
    सादर प्रणाम

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    1. आदरणीय अनीता जी आपने बिल्कुल सही फरमाया इस जीवन में दुख सुख आलोचनाएं होती रहेगी इस उत्साह वर्धन के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद

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