मंगलवार, सितंबर 22

चुप रहना भी एक कला है जो इस कला में निपुण है।

 संस्कारी और समझदार व्यक्ति कीचड़ से बच कर निकलता है ताकि उसके कपड़े गंदे ना हो जाए लेकिन कीचड़ को घमंड हो जाता है कि डर गया मुझसे🙏

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काबिल लोग ज्यादातर चुप रहना पसंद करते हैं जब तक सहन करते हैं तब तक ही, लेकिन बात सहनशक्ति से बाहर हो जाते तो एक बार में ही उसकी बोलती बंद कर देते हैं। 

यहां एक बात ध्यान देने की जरूरत है कि कुछ लोग इसे कायरता या डरपोकपन समझ लेते हैं जो उनकी बेबकूफी प्रतीक होता है। ताकत का ग़लत इस्तेमाल नहीं करें बल्कि उसे भलाई में उपयोग करें। तभी आपका जीवन सफल है।


चुप रहना भी एक कला है जो इस कला में निपुण है वह हर प्रकार से सफल व श्रेष्ठ है ।

मंगलवार, सितंबर 1

चार बातों में कभी भी शर्म औऱ संकोच नहीं मेहसूस करना चाहियें

 चार बातों में कभी भी शरम औऱ संकोच नहीं मेहसूस करना चाहियें 

1-पूराने कपड़े

 2-गरीब मित्र

 3-बुज़ुर्ग माता-पिता

 औऱ

 4-सरल जीवन-शैली..🙏